तु असताना....

ते दिवस पुन्हा..      
येणे शक्य नाही..      
तु सोबत असताना जे..      
आपल्या सोबत बागडायचे...      
      
तु सोबत असताना..      
बहरून जायचो मी..      
तुझ्या एका भेटीचीही..      
आतुरतेने वाट पाहायचो मी..      
      
तु सोबत असताना..      
हे आकाश ठेंगणं वाटायचं..      
आपल मन ही मग..      
त्याला जाऊन गाठायचं..      
      
तु सोबत असताना..      
मी फूलपाखरू व्हायचो...      
तूझ्या भोवतीने मग..      
गर गर गिरट्या घालायचो..      
      
तु सोबत असताना..      
दिवस होते छोटे...      
आता तु सोबत नसताना..      
सारेच दिवस वाटतात खोटे..      
©*मंथन*      
२६/०८/२०११ रात्रौ ११.५८

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